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17/01/2026

तब पछताते मसलते रहोगे हाथ

जब घर हमारा टूटा मस्जिद पर चला बिलडोज़र

खुशीयाँ बनाई ज़हरीलों ने जब अब्दुल हुआ बेघर

अब बारी तुम्हारी है मंदरों को तोड़ डाला

हर मूर्ती टूटी तुम्हारी है

क़ुरान पर हर्फ़ उठाते अब क्या बोली तुम्हारी है

रामायण महाभारत काल्पनिक क़िस्से

अब तो हिन्दू ह्रदय सम्राट की भी वही बोली है



हमारे मज़हब पर तो बोहोत की तनक़ीद

नामूस ए रिसालत की हुरमत की पामाल

जब राम का नाम लेने पर होगी क़ैद 

अब राम और किसनवा की बारी है 



एकता के दावे भी हैं तुम्हारे निराले 

जामा मस्जिद हटाओ हिन्दू मुस्लिम एकता बढ़ाओ 

राम मंदिर भी हटाओ सोमनाथ भी हटाओ 

फिर इस एकता को और आगे बढ़ाओ  


बड़े ही अहमक़ ज़ात है उनकी 

अपने ही मुल्क को कर के बर्बाद 

ऐसा देखा पहली बार तिब्बी इदारा

 बंद करने के बाद  


जश्न बना रहे हैं थाम के हाथों में हाथ 

वक़्त सबको देंगे सही जवाब 

जंग में फिर कौन करेगा तुम्हारा इलाज 


जाहिलों की बस्ती है जाहिलों जैसा काम 

जर्राहों की कमी से जब मरेंगें तुम्हारे अपने 

तब पछताते मसलते रहोगे हाथ  



मेरा ख़ुदा है बोहोत बड़ा कारसाज़ 

हर ज़ालिम को देता है सही वक़्त पर जवाब 



सहाफ़ी ज़ुबेर 

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