میری بلاگ کی فہرست

18/01/2026

बोहोत किया ज़ुल्म ज़ालिम ने नाहक़

 आ रहे हैं शुमाल में ग़ाज़ी के मुजाहिद

 बोहोत किया ज़ुल्म ज़ालिम ने नाहक़ 


हर ज़ुल्म का होगा अब हिसाब बराबर 

हर ज़ालिम मागेगा पनाह बस कर 


पत्थर पे जो रख दे क़दम तो निकलती है चिंगारी 

फ़िज़ा में जो शमशीर उठा दो ख़तम अय्यारी 


बाज़ू में जो दबेगी ज़ालिम की गर्दन 

मुँह से सिर्फ़ निकलेगी एक चीख़ तुम्हारी 


देख कर वोह होंसला वोह इंसाफ़ का जूनून 

हिन्द में होती गई तुम्हारी ताबेदारी 


मर्द मुजाहिद को न डरा सकेगा शैतान 

शाकिस्त हुई थी नोयान को और ख़तम वेलू बिल्जी


जिहाद में भी होना चाहिए मक़सद हक़ का 

बोहोत हुआ ज़ुल्म एक तरफ़ा उनका 

मज़बूत इरादों को हिला न सकेगा 

बातिल और फ़रेब को झुकना ही पड़ेगा 


ना कर ज़ुल्म इतना भोगना पड़े तेरी नस्लों को उतना 


तेरा मुसलमान होना तेरी शिनाख़्त बन गया 

तेरा उरूज ज़ालिम को परेशान कर रहा 


तालीम हो या सियासत महारत हो या ज़हानत 

तेरे वजूद से दुश्मन डर रहा 


एक तिब्बी दर्स गाह बंद कर दिया 

दूसरा स्कूल तोड़ दिया  

पस तेरी तालीम से दुश्मन डर गया 

बग़ैर जंग लड़े ही मर गया 


सहाफ़ी ज़ुबेर 

کوئی تبصرے نہیں:

ایک تبصرہ شائع کریں

ہر بچہ کرے گا سوال، کیوں نہ کرے بغاوت؟

 عربوں کو بھیجی گئی چوڑیاں ہوں انہیں مبارک ملت کے ساتھ جنگ میں جو ہوئے نادارِد یہود و نصاریٰ کے آگے سجدہ ریز ہو گئے رہبر افضل ہوتا تم ہو جات...