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31/01/2026

५ रूपये में ख़रीद लिया ५ की जगह ४ लिया

 कब तक वतन परस्ती साबित करें हम 

कब तक ग़ुलामी का थामे रखें परचम 


हमारा गुनाह हो गया है हिन्द में मुसलमान होना 

हर क़दम साबित करना होता है वफ़ादार होना 


कोई कह देता है साबित नहीं है तुम्हारा हिंदुस्तानी होना 

साबित करो तुम हमारे आबा ओ अजदाद के लहू शामिल 

हुए बग़ैर हिन्द का आज़ाद होना 


जो थे ग़द्दार ए वतन मुख़्बिर उनकी नस्लें 

हो गई वतन परास्त 

जो था निहायत डरपोक हो गया वीरोँ का वीर 


मुस्लिम सियासतदानों ज़ुल्म जब्र तशद्दुत के आगे 

घुटने टेंकना नहीं अफ़ज़ल है हक़ मांगो 


यह नया भारत है ज़ालिम दरिंदों से मुक़ाबला न किया 

तो ज़ालिम तुम्हे कुचल भागे 


दाएँ जानिब मोड़ चुके, तभी बाएं जानिब मोड़ा है 

दोनों जानिब मोड़ चुके तो किया काम पूरा है 


यह तुम्हारा ही तो करम है मुर्शिद 

एक फ़क़ीर मुल्क नामनिहाद ३री बड़ी माशियत 

को हमने ५ रूपये में खरीद लिया ५ की जगह ४ लिया


हम फ़क़ीरों को भीक देते यतीमों बेवा को देते ज़कात 

आलमी क़ुव्वत वाले मुल्क के अकसरियत को भीक 

देना होगा हर मियाँ के लिए एजाज़ 


जो फ़क़त १ रूपये पर फ़रोख़्त करे ईमान 

वोह लाखों करोड़ों में बेंच देगा हिंदुस्तान 

रिश्वत के चलते मार्च ९३ मैं बना था बंबई शमशान 


हो जायेंगी अकसरियत की नस्लें यतीम 

और तमाम ख़ातून बेवा 

जब यतीम होगा हर नर और बेवा होगी हर बाला 

तब हम ज़कात देंगें उनको भी देखें वोह भी सवेरा 


सहाफ़ी ज़ुबेर


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