देवर पुत्र बने स्याना, हर बात में कोई बहाना
ताऊ से झगड़ा पुराना ज़मीन के लिए ख़ून बहाना
बात बात पर वही नारा और हमको पंचर पुत्र बताना
तालीमी इदारे बंद कर ख़ुशी बनाना
चाचू को था बड़ा अभिमान
बेटा करेगा बड़ा काम
आज़ादी में होगा उसका भी नाम
पायेगा सदर ए ममलेकत से इनाम
जो फ़ेहरिस्त देखीं शहीदों की
दूर दूर था ना कोई नाम न निशान
ग़ुलामी की तमाम सिफ़त करते बयान
जहालत के तमाम गुण इनमे दूध को बहा देना
नजासत ग़लाज़त को खा जाना
पाक सगमरमर को सफ़ेद क़ब्रस्तान बताना
हर वक़्त दस्तयाब रहते चौक चौराहे
मुँह में गुटका या पान की दूकान
कॉलेज यूनिवर्सिटी में आखिर बेंच
हर बेटी पर होती इनकी नज़र
ख़ास जमात पर रहते सीना तान
यह कैसी देश भक्ती आई
एक मुस्ताफ़िज़ुर को न खिला के
पूरे देश की बदनामी कराई.
खामोश हुआ साधू खामोश हुआ आतंक
हिन्द को गर्त में भेज कहाँ छुपे तुम
एक के ऊपर मचाया बवाल, अब होगा देश से सवाल
यह नहीं देश भक्त यह है अंग्रेज़ी गुलाम
माता पिता को बड़ा यक़ीन
बेटा करेगा बड़ा काम, काम बड़ा किया
ज़ईफ़ निहत्ते का ख़ून बहा दिया
१५-२० के हूजूम ने ग़रीब निहत्ते मजबूर
को हूजूमी दहशत में हलाक किया
सहाफ़ी ज़ुबेर
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