میری بلاگ کی فہرست

22/07/2023

एक ख़ाकी मेरा मोहसिन हो गया

जो कुछ भी उलटा पलटा था दुरुस्त हो गया 

एक हवा का झोंका था आया और चला गया 

तू मुझे पहले कियों नहीं मिला राजीव 

ज़िन्दगी का तवील अर्सा बर्बाद ना हुआ होता

   

हक़ीक़त में वोह एक पराया अपनों सा हो गया


तेरी खुली हुई ज़ुल्फ़ों की छावों में 

कुछ पल बिताने की नहीं रही आरज़ू 

एक ख़ाकी मेरा मोहसिन हो गया 


दरिया की मौजों से जो डरने लगे मल्लाह 

क्या साहिल पे सफ़ीना वोह लाएगा 

मौजों के अंदर जो शनावरी कश्ती वही मल्लाह साहिल पायेगा 


ग़र्क़ होने के डर से जो छोड़ दे हुनर ग़ोता-ज़नी 

वोह ग़ोताख़ोर क्या सीपी से पायेगा मोती 


सीख ले हुनर नमल (चींटी) से हार नहीं मानती 

जब तक फतह ना कर ले चोटी 

वोह मक़सद नहीं छोड़ती 

फिर ए इंसान कोशिश करने पर तेरी कैसे हार होगी 


आला इंसान को आला अवाम ही मिलता 

हूकूमती निज़ाम में उनका किरदार दिखता 

यह शैतान है जो ज़हन में बस्ता

 

सहाफ़ी ज़ुबेर 

کوئی تبصرے نہیں:

ایک تبصرہ شائع کریں

ہر بچہ کرے گا سوال، کیوں نہ کرے بغاوت؟

 عربوں کو بھیجی گئی چوڑیاں ہوں انہیں مبارک ملت کے ساتھ جنگ میں جو ہوئے نادارِد یہود و نصاریٰ کے آگے سجدہ ریز ہو گئے رہبر افضل ہوتا تم ہو جات...