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19/07/2023

कर्बला का मुहर्रम

ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगान, हामी-ए-बे-कसाँ

ख़तम कर दो ज़ुल्म और ज़ालिम के नाम-ओ-निशाँ

 

या रब हर मोमीन में उमर का जज़बा ए ईमानी दे दे

हर मोमीन में हुसैन इब्ने अली का जज़बा ए क़ुर्बानी दे दे

 

मक्का में अल ऐलानियाँ नमाज़ के लिए ललकार दिए उमर

कर्बला में हुसैन ने शरीयत के लिए अल एलानिया उतरवा दी गर्दन

 

हुसैन नहीं तरसे पीने को पानी

क़तरा क़तरा तरस गया प्यास बुझाने हुसैनी


शाम-ए-ग़रीबाँ आ गई 

लूटा पीटा काफ़िला चला शहज़ादियाँ क़ैदी बन गई 


अज़ीम जंग ए कर्बला ना इक़्तिदार की थी

ना हासिल करने मालो दौलत

उसूल के पाबंद थे हुसैन, ज़ालिम ज़ानी को ख़तम कर

क़ायम करनी थी हक़ इन्साफ़ की हुकूमत  

 

इस्लाम की हर जंग से ज़्यादा अफ़ज़ल थी जंग ए कर्बला

शहादत ए हुसैन में मर्ग ए यज़ीद हुआ कर्बला 

हम क्यों अश्कों को बहाएं शहादत पर हुसैन 

यज़ीद मर गया हुसैन आज भी ज़िंदा रहा 

 

इस्म हुसैन से आगाज़ की गई हर तहरीक होगी कामयाब

मिल्लत और मज़हब से ग़द्दारी थी जिनकी फ़ितरत 

पहन कर सब्ज़ करते है मुवाफ़ेक़त ज़ालिम हुकूमत   

धोख़ेबाज़ों की फेहरिस्त में दर्ज हुआ नाम इनका हर वक़्त   

 

ख़ौफ़ हाकिम का हावी था इस क़दर 

कर के वादा वफ़ादारी,  तोड़ दिया अपना हलफ़

तनहा छोड़ दिया अहले ख़ाना हुसैन को मैदान में कर्बला

 

रंजीदा है आज भी हर इंसान सुन कर वाक़िया कर्बला   

प्यासा रहा ख़ानदान नबूवत पस्त ना हुआ हुसैनी हौसला  

आज उम्मा का हर फ़र्द अश्कों की सौग़ात देता है सुन कर क़िस्सा हुसैन का   


पानी रोक दिया यज़ीद ने दिखा कर अपना ग़ुरूर मसनद 

ख़त्म हुई नस्ल यज़ीद ज़िंदा है आज भी हुसैन शहीदों का सरदार बन कर

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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