पाकीज़ा अवाम के पाक हैं फ़लसफ़े
आज़ान है नाम में, ना टूटेगें दोनों के रिश्ते
ना जाने क्या होगा हम गर तुझसे जुदा हुए
क़ासिर हूँ अलफ़ाज़ से बयान करना
मर जाऊँगा गर रब सबर ना दे दे
सफ़ेद वरक़ है मेरी ज़िन्दगी, जो भी चाहे लिख दे
तेरी मोहब्बत में जो मिलेंगे अलफ़ाज़ तहरीर होंगे वही
मेरी आशिक़ी है यह तुझसे
तेरी हिकमत अमल बोहोत देख लिया मेने
तू भी मुझ पर है फ़िदा बस अब यह कह दे
नहीं भाता कोई दूजा चेहरा तू सिर्फ़ मेरे लिए है यह कह दे
सहाफ़ी ज़ुबेर
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