میری بلاگ کی فہرست

09/11/2023

रब की रेहमत से मायूस ना हैं

 तेरे इश्क़ में कहाँ कहाँ भटक आये हम

तुझको पाने की चाहत में कभी काबा कभी मदीना चले आये हम


तुझे देखने की आरज़ू हुई इसलिए तुझे बुला लिया मेने 

तेरे दीदार पर ज़माने को भूला दिया मेने 


वोह चिलमन में बैठे रहे 

हम उन्हें देखते रहे वोह हमें देखते रहे 


आँखों से झलक आये जो अश्क उनके भी फ़िराक़ ए यार में 

रब की रेहमत से मायूस ना हैं इतनी अज़ीयत पा कर भी 


उनके बहते अश्कों पर रब अपना जलवा दिखाएगा 

अनहोनी सी जो बात है अहल ए आलम के लिए उनको पूरा कर पायेगा 


सहाफ़ी ज़ुबेर

کوئی تبصرے نہیں:

ایک تبصرہ شائع کریں

ہر بچہ کرے گا سوال، کیوں نہ کرے بغاوت؟

 عربوں کو بھیجی گئی چوڑیاں ہوں انہیں مبارک ملت کے ساتھ جنگ میں جو ہوئے نادارِد یہود و نصاریٰ کے آگے سجدہ ریز ہو گئے رہبر افضل ہوتا تم ہو جات...