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11/11/2023

तेरे नाम, मेरे अश्क़

मेरे अश्क़ मेरी मुस्कुराहट से ज़्यादा अज़ीम हैं 

मुस्कराहट सब ही के लिए है, मेरे आंसूं सिर्फ़ तेरे लिए वक़्फ़ हैं।

 

सिर्फ़ आंसूं नहीं लिख दूँ ज़िन्दगी का हर गोशा तेरे नाम पर

बेख़ौफ़ हो जाऊं मेरे लिए तुझको रब से मांग कर 

फिर ना हो तुझे पाने की फ़िक्र ना हो तुझ से फ़िराक़ का डर 


साबिक़ थे वोह इंसान मुसलमान बने साबित क़दम हो कर  

आज के दौर में तुम ख़्वार हो रहे बे-ईमान हो कर


मुअज़्ज़ज़ घरों की आबरू बेपर्दा, बरहना हो गई तहज़ीब के नाम पर

मस्जिदों के वारिस रक़्स कर रहे मूसीक़ी, तफ़रीह के नाम पर 

तुम में से कोई तो है आज भी क़ाबिल-ए-एहतिराम आला तालीम पा कर 

क़ाबिल ए दार ज़लील हो रहा सज़ा पा कर 


रक़्स करना है गर फ़ितरत तुम्हारी 

चले आओ किसी माशूक़ के मैख़ाने में 

दोनों जहाँ मिलेगें रक़्स पर उसका हाथ थाम कर


अहल ए अरब ही थे जो मुहतरम हुए मुसलमान हो कर 

तुम रुसवा हो रहे यहूद नसारा की बनाई धून को 

अपना ईमान जान कर    


इख़्तेयार किया उन्होंने ईमान ज़िन्दगी में फ़लसफ़ा क़ुरान जान कर 

 तर्क किया क़ुरान तुमने आलिम हो कर


करते हो रब से तवक़्क़ो करामात हो जाए    

ज़रा अपने अमल पर नज़र भी हो जाए 

करामात आज भी होगी ए मुसलमान 

गर तू अपने गुनाहो पर पशेमान हो जाए 


हर अमल पर कर तू अपनी नज़र ए सानी 

सहाफ़त की किसी लुग़त पर तेरा अमल मुजल्ला हो जाए 

किसी शायर या अदीब के लिए तू मख़सूस हो जाए 

अशआर क़लमबन्द किये जाए तेरे नाम पर ए मुसलमां 

तू भी मशहूर हो जाए मक़बूल हो जाए


 सहाफ़ी ज़ुबेर

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