जहाँ अक़ल ख़तम होती है
वहां से तेरी हिकमत शुरू होती है
जब सभी दरवाज़े बंद होतें
हैं तेरी रेहमत हज़ारों दरवाज़ों पर भारी होती है
कभी तकलीफ़ में ना तोड़ना
हौसला अपना ए पाकिज़ा फौजी
हर आज़माइश के बाद रब
के इनामों की शुरूवात होती है
जो रक़्स कर रहें हैं
अहल ए अरब बरहना जिस्म पर
उनकी पेशी रब की बारगाह
में होगी
तू ना ग़म कर ना ३ दिन
से ज़्यादा सौग मना ए अहल ए ईमान
ग़म की काली रात कभी
तो ख़तम होगी
जिनका काम था अपने कूल्हे
मटकाना
उन्होंने अपना किरदार
मौसीक़ी पर रक़्स कर दिखाया
तेरा काम है हक़ बात
फ़ैलाना, तू अपना किरदार तेरे अमल से बता दे
ज़हरीली हो चुकी हैं
ख़ूब हर ख़ित्ते की फ़िज़ाएं
जो तेरा हमदर्द हो मोहब्बत
की बात उस ही को बताना
अपना ग़म आलम पर आशकार करने से बेहतर है
ख़ामोशी से रब के हुज़ूर
आंसूं बहाना
जो तेरे ज़ख्मों को देख
कर भी ज़ालिम की करे ताईद
ऐसों से अलहदगी इख़्तेयार
कर सब कुछ रब को बताना
सहाफ़ी ज़ुबेर
کوئی تبصرے نہیں:
ایک تبصرہ شائع کریں