میری بلاگ کی فہرست

09/03/2023

तेरी हैसियत तेरी औक़ात।

जब पैमाना भर जाता है जी चाहता है ख़ुद छलका दूँ 

तेरे इश्क़ में दिल जब भर आता  है

जी चाहता तुझको गले लगा लूँ

 

तू ना मिला ना सही जी चाहता है 

फ़िज़ाओं को दर-ओ-दीवार को गले लगा लूँ


दरवेशी की परवाज़ को कर इतना बुलंद,

कर अदा हर दम शुक्र ए इलाही 

के तक़दीर लिखने वाले से दरवेश मांग ले

हर बन्दे  के हक़ में फ़लाही


हर ज़र्रा है पाक हर ज़मीन हो गई पाक 

जहाँ भी चाहे अब कर ले सजदा 

ना फ़र्श देख ना आफ़ताब 


 क्या रखा है मुस्लिम नाम में तेरे जब अमल है मुनाफ़िक़ाना

नाम से नहीं अमल से पहचाने तुझे ज़माना 

तेरा किरदार है मुनाफ़िक़ाना अमल काफ़िराना

मुल्हिद है तू मुकाफ़ात ए अमल तेरा मुजरिमाना 


है काफ़िरों की बस्ती करती एक ख़ुदा पर यक़ीन

तू इस जहाँ का रहा ना उस जहाँ का

जब हुआ बदगुमाने दीन 


टके के भाव नहीं बिकते तेरे बेहूदा फ़लसफ़े

होगी दुसरे घरों बैतउल ख़ला में घुसने की तेरी आदत 

हम तो तेरी हैसियत तेरे किरदार से पहचाने 

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

کوئی تبصرے نہیں:

ایک تبصرہ شائع کریں

ہر بچہ کرے گا سوال، کیوں نہ کرے بغاوت؟

 عربوں کو بھیجی گئی چوڑیاں ہوں انہیں مبارک ملت کے ساتھ جنگ میں جو ہوئے نادارِد یہود و نصاریٰ کے آگے سجدہ ریز ہو گئے رہبر افضل ہوتا تم ہو جات...