रमज़ान आया रमज़ान आया
मोमीनों रमज़ान का माहे मुक़द्दस आ गया
माहे मुक़द्दस इबादतों का ज़ौक़ लाया
रहमतों के सलासा अशरे ले कर आया
सेहरी अफ़्तार का करो एहतेमाम दिल भर
मोमीनों आओ करें रमज़ान का ख़ैर मक़दम
निकालो
ज़कात अपने माल में
पा
लो मुनाफ़ा ७० हर हाल में
करो
इबादत दिल खोल कर
ज़ालिम मरदूत हो जाता है क़ैद इस ही महीने
क़ुरान भी नाज़िल इस ही महीने
रोज़ेदारों पर ख़ास है रेहमत ऐ ख़ुदा वंदी
का नुज़ूल इस ही महीने
दो अश्क़ नदामत के बहा तू भी
आबदीदा अपने गुनाहों से मांग ले माफ़ी
मासूम हो जाएगा तू भी इस ही महीनेरोज़ा मोमीन रब के लिए है रखता
जज़ा उसकी रब ही देता, ख़ुश्क हो गए लब मासूम के
पानी ना पिया ख़ौफ़े ख़ुदा से
ले कर गया मेहफ़ूज़ जो अपने रोज़े को
शाम ढलते ही मिलते ग़ैबी तोहफे उसको
सुबह सादिक़ से ग़ुरूब तक बचो हर गुनाह से
तर्क करो खाना पीना और दूर रहो हर बुराई से
दस्तरख़ान पर रोज़ेदार की करते वाह वाही फ़रिश्ते
इफ़्तार की हर दुआ पर कहते आमीन फ़रिश्ते
माँगी जो भी हाजत रोज़ेदार ने बताई
शाम ढलने से क़ब्ल बन्दे की हाजत रवाई
३० दिन जो मोमीन गुज़ारे रब की मर्ज़ी
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