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11/03/2023

ख़ुशआमदीद माहे मुकर्रम

 

रमज़ान आया रमज़ान आया

मोमीनों रमज़ान का माहे मुक़द्दस गया

माहे मुक़द्दस इबादतों का ज़ौक़ लाया


रहमतों के सलासा अशरे ले कर आया

सेहरी अफ़्तार का करो एहतेमाम दिल भर

नवाज़ेगा रब तुमको जग भर

मोमीनों आओ करें रमज़ान का ख़ैर मक़दम

उनसे विदा होने पर हर रोज़ेदार की हों आँखे नम


निकालो ज़कात अपने माल में

पा लो मुनाफ़ा ७० हर हाल में

करो इबादत दिल खोल कर

पड़ो तरावीह करो शबीना शब-भर


ज़ालिम मरदूत हो जाता है क़ैद इस ही महीने

क़ुरान भी नाज़िल इस ही महीने

रोज़ेदारों पर ख़ास है रेहमत ऐ ख़ुदा वंदी 

का नुज़ूल इस ही महीने


दो अश्क़ नदामत के बहा तू भी 

आबदीदा अपने गुनाहों से मांग ले माफ़ी

मासूम हो जाएगा तू भी इस ही महीने

जैसे अभी विलादत हुई इस ही महीने


रोज़ा मोमीन रब के लिए है रखता 

जज़ा उसकी रब ही देता, ख़ुश्क हो गए लब मासूम के

पानी ना पिया ख़ौफ़े ख़ुदा से

ले कर गया मेहफ़ूज़ जो अपने रोज़े को

शाम ढलते ही मिलते ग़ैबी तोहफे उसको


सुबह सादिक़ से ग़ुरूब तक बचो हर गुनाह से

तर्क करो खाना पीना और दूर रहो हर बुराई से


दस्तरख़ान पर रोज़ेदार की करते वाह वाही फ़रिश्ते  

इफ़्तार की हर दुआ पर कहते आमीन फ़रिश्ते 

रब की रेहमत फिर जोश में आई


माँगी जो भी हाजत रोज़ेदार ने बताई  

शाम ढलने से क़ब्ल बन्दे की हाजत रवाई 


३० दिन जो मोमीन गुज़ारे रब की मर्ज़ी

शव्वाल के रोज़ ख़ाओ ख़ुश्क मेवे और चिलग़ोज़े


सहाफ़ी ज़ुबेर

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