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18/10/2023

एक दुआ

एक दुआ जो बन गई मुहाफ़िज़ मेरी

हाजत नहीं शैतानी बलाओं से ख़ौफ़ज़दा होने की

 क़लम जो मेरा तोड़ना चाहता था हाकिम ए वक़्त

रोशनाई ना ख़ुश्क़ हुई तहरीर ना बंद हुई


लानत का मुर्तकिब हुआ आज मुसलमान

मासूम बच्चों और नौजवानों की लाशें देख ना जागा तेरा ईमान 

ला इलाहा इल्लालह पर हुए थे जो कुफ्र की ज़मीन से तक़सीम   

ऐसे मुल्क भी ख़ामोश बूत बने बंद की ज़ुबान   


सऊद तो सदा से है ही यहूद का ग़ुलाम

गर काबा और मेहबूब की हुरमत ना होती दरमियान  

तो बदज़ुबान हो जाती तहरीर और मेरी ज़ुबान 


ज़ालिम की चंद अमवात पर हुआ तू उसके साथ 

फ़लस्तीन में हर रोज़ ही बनते है मासूमों के मज़ार


बेशर्मों पर अब तो आती नहीं हया 

उम्मत को तक़सीम कर फ़िर्क़ों में बाँट दिया


वक़्त पर ना बरेलवी वाले काम आये ना 

ला इलाहा इल्लाह वाले काम आये 

ना नजद की अब्दुल वहाब की औलाद

कूदस की दिफ़ा को फ़ौज भेजी किसने शिया अहले ईरान 


शर्म आती नहीं तुमको ए मुसलमान 

तुमको क़तल करने यहूद, नसरानी हो गए कुफ्र के साथ 

तुम्हारा एक ख़ुदा एक कलमा पर 

तुम्हारे वजूद पर भी तुम्हारी मुख़्तलिफ़ ज़ुबान  


तुमको जोहरी क़ुव्वत हासिल होने पर 

सबसे ज़्यादा मुसर्रत हुई थी किसको

अब फ़तह होगी क़ुदस जोहरी ताक़त मिल गई हमको 


ग़फ़लत में जी रहा था फ़लस्तीन का अवाम 

ला इलाहा इल्लाह वाले निकले सब चोर डाकू और बेईमान

जिन्होंने अपनी ही रियाया को लूटा 

क्या आज़ाद करवायेगें कूदस को ऐसे हाकिम कमज़ोर ईमान


जब हाकिम में ईमान का अदना दर्जा भी ना हो मौजूद

तो समझ लो ख़तम होने वाला है तुम्हारा वजूद 


ख़ौफ़ ए ज़ालिम गर ना है तारी तुम पर 

उसने अल एलानिया बोला हम हैं ज़ालिम के साथ 

तुम बोल दो हम हैं मज़लूम की दिफ़ा को तय्यार

काट दो अपने हलक़े से ज़ालिम की नब्ज़ माशी 

मंसूख कर दो उससे तमाम मुहायदे सिफ़ारती और तिजारती  


हक़ और बातिल की जंग में तुम हो किस के साथ 

सारे ज़ालिम एक सफ़ में तुम हो जाओ हक़ वालों के साथ 


सहाफ़ी ज़ुबेर

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