तोड़ दिया यह किस ने कच्ची कली को
मोड़ दिया किस ने उसके बचपन को
हैवानों के देस में भटक रही मासूम
खिड़की दरवाज़े बंद कर मुँह मोड़ लिया किस
ने
यह कैसा राम राज्य बनाया
मामा के भेस में कंस आया
देव नगरी में भटक रही दर दर
चीर फाड़ करने हर दर पर बैठे थे रावण
लहू से लथ पथ आधी बरहना, कोई नहीं उसका साथी
लाज अपनी कैसे छुपाती विपदा अपनी किस को बताती
तकलीफ़ ऐसी उसको सताती, ठीक से वोह चल भी ना पाती
पंडित जी ने जब देखा यह नज़ारा
आंसूं झलके मदद को उसकी निकले
हमदर्दी के साथ अपना किरदार दिखाया
पुलिस को सौपने तक मासूम का ख़ूब साथ निभाया
खाकी अफसर भी कुछ पीछे नहीं था
बच्ची को अपनाया बेटी उसको अपनी बनाया
घाव जो लगे उसके चित पर, क्या वोह मिट पायेगें उम्र भर
दिमाग़ी मरीज़ कहीं वोह ना बन जाए
तकलीफ़ उसको हर दम सताये
उठो नौजवानों हाथ से हाथ मिलाओ
अज़्म करो अब कोई बच्ची ना लूटने पाए
बागिया की हर कली को तुम्हे बचाना
अपनी पराये हर बच्ची को बचाना
नाजाइज़ कोई कर ना पाए
उम्र से पहले ना उसको माँ बनाना
यह कैसा नया भारत बनाया हर दर पर बेटी को लुटवाया
जब सियासतदाँ ही करे महिला की इज़्ज़त का बखान
हर गली नुक्कड़ पर मिलेगा बैठा शैतान
सहाफ़ी ज़ुबेर
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